मात्र 6 दिन में आयुर्वेदिक दवा 'फीफाट्रोल' से कोरोना का मरीज संक्रमणमुक्त हुआ; पढ़ें पूरी केस स्टडी - ucnews.in

गुरुवार, 5 नवंबर 2020

मात्र 6 दिन में आयुर्वेदिक दवा 'फीफाट्रोल' से कोरोना का मरीज संक्रमणमुक्त हुआ; पढ़ें पूरी केस स्टडी

आयुर्वेद की दवा फीफाट्रोल से मात्र 6 दिन में कोरोना के मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आई है। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA ) दिल्ली के डॉक्टरों ने आयुर्वेदिक दवा फीफाट्रोल का प्रयोग कोरोना के मरीजों पर किया। डॉक्टरों का दावा है, मरीज एक हफ्ते में संक्रमणमुक्त हो गया। मरीज को प्राकृतिक दवाओं और आयुर्वेदिक थैरेपी से ठीक किया गया।

मरीज की केस स्टडी से समझें पूरा मामला
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के जर्नल में पब्लिश रिपोर्ट कहती है, दिल्ली में रहने वाले 30 साल के एक हेल्थ वर्कर में कोरोना का संक्रमण हुआ। उसे क्वारैंटाइन रहने की सलाह दी गई। मरीज में कोरोना के ज्यादातर लक्षण सामान्य थे।

ट्रीटमेंट के दौरान उसे फीफाट्रोल की टेबलेट्स, शम्समणि वटी, आयुष क्वाथ और लक्ष्मीविलास रस दिया गया। खानपान में बदलाव किया गया। इसके साथ ही उसे सत्ववाज्य चिकित्सा दी गई। यह आयुर्वेद में दी जाने एक सायकोथैरेपी है।

यह ट्रीटमेंट बुखार, सांस लेने में दिक्कत, थकान, भूख न लगना, गंध का पता न चल पाना जैसे लक्षणों के लिए तैयार किया गया था। इलाज शुरु होने के बाद छठे दिन मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आई। 16वें दिन भी आरटी-पीसीआर टेस्ट हुआ, जो निगेटिव रहा।

फीफाट्रोल काम कैसे करती है
आयुर्वेद की कई जानी-मानी दवाओं और हर्ब्स को मिलकर फीफाट्रोल तैयार की गई है। यह मरीज की इम्युनिटी बढ़ाने का काम करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दवा इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाकर संक्रमण के असर को कम करती है। इससे रिकवरी भी तेज होती है।

यह दवा एंटीबायोटिक है लेकिन फ्लू और दर्द में भी दी जाती है। नेशनल डेवलपमेंट रिसर्च कार्पोरेशन के मुताबिक, फीफाट्रोल नाक से जुड़ी दिक्कतों, गले में सूजन, शरीर और सिर में दर्द से भी राहत देती है। सांस की नली से जुड़े संक्रमण का इलाज करने में इसका प्रयोग किया जा सकता है। इसमें कई तरह के माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स हैं।

कौन तैयार करता है यह दवा
फीफाट्रोल को आयुर्वेदिक दवाएं बनाने वाली भारतीय कम्पनी ऐमिल फार्मा तैयार करती है। इसमें इम्युनिटी बढ़ाने वाली हर्ब्स जैसे गुडुची, संजीवनी घनवटी, दारुहरिद्रा, चिरायता, कुटकी, तुलसी, गोदांति भस्म और मृत्युंजय रस का प्रयोग किया गया है। यह वायरस और बैक्टीरिया दोनों के संक्रमण से लड़ती है।



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